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  •  नकसीर व रक्तपित्त, श्वास, कफ और खांसी की बीमारी में लाभकारी है ।
  • यह सर्दी-जुकाम के लिए भी लाभकारी हो सकता है । अडूसा में एंटी-एलर्जिक गुण मौजूद होते हैं ।
  • यह खांसी और श्वास संबंधी समस्याओं के इलाज में कारगर औषधि है (अडूसा का पौधा कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए रामबाण औषधि साबित हो सकता है, क्योंकि यह कफ को पतला कर कम करने का काम करता है ।)
  • लिवर को स्वस्थ रखने के लिए भी अडूसा का सेवन किया जा सकता है । इससे क्षय (टी.बी.) से राहत मिलती है ।
  • अडूसा में एंटी-डायबिटिक गुण मौजूद होते हैं, जो रक्त शर्करा को कम कर मधुमेह की परेशानी में लाभदायक हो सकते हैं ।

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अडूसा अर्क

दादी-नानी के जमाने से वासा का प्रयोग सर्दी-जुकाम के इलाज के लिए घरेलू नुस्ख़ों के तौर पर सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है ।

वासा को अडूसा (ardusi) भी कहते हैं । 

आयुर्वेद में कहा जाता है कि वासा वात, पित्त और कफ को कम करने में बहुत काम आता है । इसके अलावा वासा सिरदर्द, आँखों की बीमारी, पाइल्स, मूत्र रोग जैसी अनेक बीमारियों में बहुत फायदेमंद साबित होता है ।

आचार्य चरक ने वासा को रक्तपित्त की चिकित्सा में श्रेष्ठ माना है । वासा का पत्ता शाक, कफ, पित्त को कम करने वाला होता है । नेत्ररोगों के साथ अश्मरी (पथरी) शर्करा (ब्लड ग्लूकोज), कुष्ठ, ग्रहणी (Irritable bowel syndrome), योनिरोग (Vaginal related disease) और वात संबंधी बीमारियों में अन्य द्रव्यों के साथ वासा का प्रयोग मिलता है । ‘सुश्रुत-संहिता’ में क्षारक्रिया में इसकी गणना की गई है । 

Ingredients – सामग्री

  • अडूसा

Adusa Ark Benefits in Hindi [Adusa Ark ke Fayde]

  •  नकसीर व रक्तपित्त, श्वास, कफ और खांसी की बीमारी में लाभकारी है ।
  • यह सर्दी-जुकाम के लिए भी लाभकारी हो सकता है । अडूसा में एंटी-एलर्जिक गुण मौजूद होते हैं ।
  • यह खांसी और श्वास संबंधी समस्याओं के इलाज में कारगर औषधि है (अडूसा का पौधा कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए रामबाण औषधि साबित हो सकता है, क्योंकि यह कफ को पतला कर कम करने का काम करता है ।)
  • लिवर को स्वस्थ रखने के लिए भी अडूसा का सेवन किया जा सकता है । इससे क्षय (टी.बी.) से राहत मिलती है ।
  • अडूसा में एंटी-डायबिटिक गुण मौजूद होते हैं, जो रक्त शर्करा को कम कर मधुमेह की परेशानी में लाभदायक हो सकते हैं ।

अन्य प्रयोग :

  • 5 मिली अडूसा अर्क को शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से पुरानी खांसी, श्वास और क्षय रोग में लाभ होता है ।
  • अडूसा, मुनक्का और मिश्री का क्वाथ बनाकर 10-20 मिली क्वाथ दिन में तीन-चार बार पिलाने से सूखी खांसी का शमन होता है ।
  •  5 मिली अडूसा के रस में शहद मिलाकर 7 दिन तक सेवन करने से धातुक्षय तथा श्वास का शमन हो जाता है ।
  • 2 ग्राम अमृतासत्व, 60 मिग्रा. ताम्र भस्म तथा 2 ग्राम बेलगिरी के चूर्ण को मिलाकर 5 मिली अडूसा के रस के साथ प्रातः-सायं प्रयोग करने से क्षय, कास तथा श्वास का शमन होता है ।
  • अडूसा अर्क 1 चम्मच तथा 1 चम्मच अदरक रस में, 1 चम्मच शहद मिलाकर पीने से सभी प्रकार की खांसी में आराम हो जाता है ।
  • मसालेदार या रास्ते का तला हुआ खाना खाने से संक्रमण के कारण दस्त हो और रुकने का नाम न ले तो 10-20 मिली अडूसा अर्क को दिन में तीन-चार बार पीने से दस्त में लाभ होता है ।
  • पेट में जल या प्रोटीन द्रव्य के ज्यादा हो जाने के कारण पेट फूल जाता है और दर्द होने लगता है । ऐसी परेशानी में अडूसा अर्क बहुत फायदेमंद होता है । जलोदर में या उस समय जब सारा शरीर श्वेत हो जाय, उसमें अडूसा अर्क का 10-20 मिली. स्वरस दिन में 2-3 बार पिलाने से लाभ होता है ।
  • अडूसा अर्क के 10 मिली. रस में मधु और मिश्री समान मात्रा में मिलाकर पिलाने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है ।
  • अडूसा अर्क के 5 मिली. में 5 मिली. शहद मिलाकर पिलाने से गुर्दे के भयंकर दर्द में आश्चर्यजनक रूप से लाभ पहुंचता है ।
  • महिलाओं को अक्सर योनि से सफेद पानी निकलने की समस्या होती है । सफेद पानी का स्राव अत्याधिक होने पर कमजोरी भी हो जाती है । इससे राहत पाने में अडूसा अर्क का सेवन फायदेमंद होता है ।
  • अडूसा के 10-15 मिली. रस में अथवा गिलोय के रस में 5 ग्राम खाँड तथा 1 चम्मच मधु मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से प्रदर में लाभ होता है ।
  • नकसीर और रक्तपित्त में अडूसा का उपयोग फायदेमंद होता है क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार इसमें रक्त संग्राहिका का गुण होता है । इस गुण की वजह से ही यह रक्तस्राव को नियंत्रित करने में मदद करता है । 
  • अडूसा अर्क 10-20 मिली. मात्रा में मधु तथा खाँड मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से भयंकर रक्तपित्त शांत हो जाता है ।
  • 10-20 मिली अडूसा अर्क में तालीसपत्र (2 गाम) चूर्ण तथा मधु मिलाकर सुबह-शाम पीने से कफ की बीमारी, पित्त विकार, दम फूलना, गले की खराश तथा रक्तपित्त ठीक होता है ।
  • चाहें वह गर्मी का मौसम हो या सर्दी का, किसी-किसी के शरीर से बहुत दुर्गंध आती है । अडूसा अर्क में थोड़ा शंखचूर्ण मिलाकर लगाने से शरीर की दुर्गन्ध दूर हो जाती है ।
  • अडूसा जलीय कीड़ों तथा जन्तुओं के लिए विषैला है, मेंढक इत्यादि छोटे जन्तु इससे मर जाते हैं । इसलिए पानी को शुद्ध करने के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है ।
  • गाय तथा बैलों को यदि कोई उदर व्याधि हो तो उनके चारे में इसके पत्तों की कुटी मिला देने से लाभ होता है। बैलों के उदर कृमि नष्ट हो जाते हैं ।

How To Use Adusa Ark – उपयोग विधि [Kaise Upyog Kare] – Dosage

  • 5 से 15 मिली. दिन में एक या दो बार खाली पेट पानी के साथ (खुराक व्यक्तियों की उम्र, वजन और बीमारी पर निर्भर करती है । या जैसा चिकित्सक द्वारा निर्देशित है ।)

Additional information

Weight 280 g
Volume

210ml

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