पलाश के फूलों से होली खेलें
होली के बाद सूर्य की किरणें धरती पर सीधी पड़ेंगी तो आपके सप्तरंग और सप्तधातुएँ थोड़ी कम्पायमान होगी । आपके शरीर में रोगप्रतिकारक शक्ति मजबूत रहे इसलिए इन्हें संतुलित रखने के लिए पलाश के पुष्पों से होली खेलने की व्यवस्था थी । दुर्भाग्यवश जब रासायनिक रंगों से होली खेलते हैं तो अभी वैज्ञानिक भी बताते हैं कि उनमें विभिन्न प्रकार के हानिकारक पदार्थ पड़ते हैं जो रोमकूपों के द्वारा तुम्हारे सप्तरंगों को उत्तेजित कर देते हैं और आँखों पर अगर उन रंगों का प्रभाव ज्यादा पड़े तो नजर पर बुरा असर पड़ सकता है अपने बचाव के साथ-साथ अड़ोस-पड़ोस में भी इस बात का थोड़ा प्रचार कर देना ।
पलाश के रंग से अगर आप होली खेलते हैं तो क्षमा व गम्भीरता का सद्गुण बदेगा, उत्पादन शक्ति का सामर्थ्य बढ़ेगा, स्थिरता बढ़ेगी, वैभव बढ़ेगा, मजबूती और संजीदगी का आपका स्वभाव बढ़ेगा। हृदय-संस्थान और मस्तिष्क की दुर्बलता दूर होगी। उदासी और उन्माद दूर होगा। अगर आप रासायनिक रंगों से होली खेलते हैं तो इन सारे फायदों से वंचित होकर इसके विपरीत नुकसान होने की सम्भावना है। विदेशों में ऐसे सत्संग नहीं मिलते और लोग ऐसे-वैसे लाल रंगों के उत्तेजक कपड़े पहनते हैं या उत्तेजक दृश्य देखते हैं तो वे बेचारे हिन्दुस्तानियों से ज्यादा बीमार, ज्यादा असहिष्णु और ज्यादा आत्महत्याएँ करके दुःख के भागी बनते हैं। हम तो चाहते हैं कि वे भी बेचारे सुख के भागी बने और आप भी सुखस्वरूप प्रह्लाद की नाई अपने जीवन में विघ्न-बाधाओं से अप्रभावित रहकर आनंद और माधुर्य में चमकते रहें ।
पलाश के फूलों का रंग रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाता है । गर्मी को पचाने की, सप्तरंगों व सप्तधातुओं को संतुलित करने की क्षमता पलाश में है । पित्त और वायु मिलकर हृदयाघात (हार्ट- अटैक) का कारण बनते हैं। लेकिन जिस पर पलाश के फूलों का रंग छिड़क देते हैं उसका पित्त शांत हो जाता है तो हृदयाघात कहाँ से आयेगा ? वायुसंबंधी 80 प्रकार की बीमारियों को भगाने की शक्ति इस पलाश के रंग में है। पलाश के फूलों से जो होली खेली जाती है, उसमें अन्य रासायनिक रंगों की अपेक्षा पानी की बचत भी होती है ।

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