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✸गौमूत्र सौंठादि अर्क, तिल्ली रोग की बीमारी के बढ़ने पर इस्तेमाल होने वाली औषधि है । इसके निर्माण के लिए 50 ग्राम गौमूत्र सौंठादि अर्क में नमक मिलाकर रोजाना प्रयोग से शीघ्र फायदा पहुंचता है ।

☛इस बीमारी में प्रभावित जगह पर गौमूत्र सौंठादि अर्क का सेक भी उपयोगी साबित हो सकता है । इसे करने के लिए एक साफ ईंट को थोड़ा गर्म करना होता है और एक साफ कपड़े को गौमूत्र सौंठादि अर्क में भिगो कर ईंट पे लपेट लें इसके बाद गर्म ईंट से प्रभावित जगह पर हल्का-हल्का सेंक करें। इससे प्लीहा घटने लगती है ।

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gaumutra saunthadi ark
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गौमूत्र सौंठादि अर्क

सामग्री-

  • गौमूत्र  – 93.7%
  • सौंठ – 2.5%
  • तुलसी – 2%
  • कचनार – 1%
  • सौंफ – 0.4%
  • जीरा – 0.4%
  • गौमूत्र के साथ सोंठ, तुलसी और कचनार इसके फायदों को और बढ़ा देते हैं । 

Gaumutra Saunthadi Ark Benefits in Hindi [Gaumutra Saunthadi Ark ke Fayde]

  • गौमूत्र सौंठादि अर्क, तिल्ली रोग की बीमारी के बढ़ने पर इस्तेमाल होने वाली औषधि है । इसके निर्माण के लिए 50 ग्राम गौमूत्र सौंठादि अर्क में नमक मिलाकर रोजाना प्रयोग से शीघ्र फायदा पहुंचता है ।
  • इस बीमारी में प्रभावित जगह पर गौमूत्र सौंठादि अर्क का सेक भी उपयोगी साबित हो सकता है । इसे करने के लिए एक साफ ईंट को थोड़ा गर्म करना होता है और एक साफ कपड़े को गौमूत्र सौंठादि अर्क में भिगो कर ईंट पे लपेट लें इसके बाद गर्म ईंट से प्रभावित जगह पर हल्का-हल्का सेंक करें। इससे प्लीहा घटने लगती है ।
  • यदि आप जॉइंट पेन से परेशान हैं, तो भी दर्द वाली जगह पर गौमूत्र सौंठादि अर्क की सिकाई करने से आराम मिलता है ।
  • गौमूत्र सौंठादि अर्क का प्रभाव थ्रोट कैंसर, फूड पाइप के कैंसर और पेट के कैंसर के लिए बहुत ही कारगर साबित हुआ है । करक्यूमिन की कमी से शरीर में कैंसर रोग विकसित होता है, गौमूत्र सौंठादि अर्क में करक्यूमिन भरपूर मात्रा में होती है और पीने के बाद बहुत जल्दी पचता है जो बहुत प्रभावी होता है ।
  • गौमूत्र सौंठादि अर्क एक ब्लड प्यूरीफायर है।
  • गौमूत्र सौंठादि अर्क लिवर की सूजन को कम करने के एक कारगर उपाय है ।
  • गौमूत्र सौंठादि अर्क को मोटापा कम करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है । 
  • एक गिलास पानी में चार बूंद गौमूत्र सौंठादि अर्क के साथ 1 चम्‍मच नींबू का रस और 2 चम्मच शहद मिला कर रोजाना पीने से लाभ मिलता है ।
  • गौमूत्र सौंठादि अर्क सफेद दाग या कुष्ठ रोग के लिए भी एक प्रभावी उपचार माना जाता है । 
  • गौमूत्र सौंठादि अर्क को जीरा में मिलाकर इसके लेप को शरीर पर लगाना चाहिए, यह खाज-खुजली को ठीक करता है । 
  • गौमूत्र सौंठादि त्वचा की बीमारियों जैसे एक्जिमा, सोरायसिस आदि में भी फायदेमंद है ।
  • गौमूत्र सौंठादि अर्क में एंटी- बैक्टीरियल गुण होता है। गले में खराश के इलाज के लिए एक चम्मच गौमूत्र सौंठादि अर्क को हल्का गर्म करके इसमें एक चम्मच शहद, एक चुटकी हल्दी पाउडर को अच्छी तरह मिलाएं, अब इस मिश्रण से 1-2 मिनट के लिए कुल्ला करें ।
  • अगर पेट में गैस की शिकायत है, तो रोज़ सुबह खाली पेट गौमूत्र सौंठादि अर्क के साथ नींबू का रस और नमक मिलाकर पी सकते हैं, ऐसा करने के एक घंटे बाद ही नाश्ता किया जाना चाहिए ।
  • कब्ज रोगी को गौमूत्र सौंठादि अर्क दिन में थोड़ा-थोड़ा 3 से 4 बार लेना चाहिए ।
  • संसाधित किया हुआ गौमूत्र सौंठादि अर्क अधिक प्रभावकारी, प्रतिजैविक, रोगाणु रोधक, ज्वरनाशी, कवकरोधी और प्रतिजीवाणु बन जाता है ।
  • गौमूत्र सौंठादि अर्क एक जैविक टॉनिक के समान है, यह शरीर-प्रणाली में औषधि के समान काम करता है ।
  • गौमूत्र सौंठादि अर्क शरीर में ‘सेल डिवीज़न इन्हिबिटरी एक्टिविटी’ को बढ़ाता है और कैंसर के मरीज़ों के लिए बहुत लाभदायक है ।
  • गौमूत्र सौंठादि अर्क आयुर्वेदिक औषधि गुर्दे, श्वसन और हृदय सम्बन्धी रोग, संक्रामक रोग और संधिशोथ, इत्यादि कई व्याधियों से मुक्ति दिलाता है ।

How To Use Gaumutra Saunthadi Ark – उपयोग विधि [Kaise Upyog Kare] – Dosage

10 से 20 मिली. अर्क 2-2 गिलोय-तुलसी घनवटी के साथ खाली पेट । 

Additional information

Weight 580 g
Volume

500ml

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