परम तप
हर क्षेत्र में सफलता की शर्त एकाग्रता है । विद्यार्थी जीवन हो, खिलाड़ी जीवन हो, व्यवसायिक जीवन हो या नौकरी-धंधे का क्षेत्र हो, व्यवहार हो चाहे परमार्थ हो… जितने प्रमाण में एकाग्रता होगी उतनी सफलता मिलेगी । बड़े-बड़े कार्यों में सफल हुए व्यक्तियों की सफलता का राज उनके चित्त की एकाग्रता है । एकाग्रता को कैसे बढ़ायें, एकाग्रता का उपयोग किसमें करना चाहिए । इन सभी बातों को पूज्य संत श्री आशारामजी बापू ने सहज और सरल भाषा में अपने सत्संगों में समझाया है, जिसे ‘परम तप’ सत्साहित्य में संकलित किया गया है । इसमें आप जानेंगे :
* एकाग्रता के बल पर अद्भुत चमत्कार
* सफलता की कुंजी है एकाग्रता
* एकाग्रता से मिलती है आत्मशांति
* कर्कटी राक्षसी को एकाग्रता से मिली परम विश्रांति
* भक्त की दृढ़ धारणा का चमत्कार
* यदि व्यवहार में एकाग्रता का बल है तो शत्रु आपका कुछ बिगाड़ नहीं सकते
* एकाग्रता होगी तो तत्त्वचिंतन सफल होगा
* इन्द्र और विरोचन को ब्रह्माजी का आत्मज्ञान का उपदेश
* कठिन-से-कठिन समस्याओं को सुलझाने की कुंजी है एकाग्रता
* विक्रमादित्य की दृढ़ता के कारण प्रकट होना पड़ा सूर्यदेव को
* संत रैदासजी की एकाग्रता
* समय की कीमत को पहचानें…
* अनंत का अनुसंधान बना देगा महान
* कलियुग में प्रभुप्राप्ति सुलभ
* एक बंगाली न्यायाधीश की प्रेरक कथा
* भक्तों की एकाग्रता के अद्भुत चमत्कार
* केवल दो मिनट ही सही एकाग्रता का आरम्भ करें…
* जिज्ञासु के प्रश्न और उड़िया बाबा के उत्तर

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