बाल भजनमाला
काव्य हृदय की अभिव्यक्ति है । किसी प्रिय सात्त्विक काव्य, गीत, भजन, श्लोक आदि का वाचन, पठन, उच्चारण करने से भी जीवनीशक्ति का संरक्षण होता है, तनाव जैसी समस्या से व्यक्ति सुरक्षित रहता है । माता-पिता-गुरु-ईश्वर में भक्ति व देश-धर्म के प्रति निष्ठा बढ़ानेवाले, प्राणबल-मनोबल भरनेवाले, बच्चों में सुसंस्कार जगानेवाले, ब्रह्मचर्य की महिमा प्रकट करनेवाले व संतों-महापुरुषों द्वारा रचित प्रेरणाप्रद काव्यों का संकलन है पुस्तक ‘बाल भजनमाला’ । इसमें है :
- हे प्रभु ! आनंददाता !!… (प्रार्थना)
- कदम अपना आगे बढ़ाता चला जा…
- ब्रह्मचर्य के पालन से…
- पीछे मुड़कर क्या देखे है…
- हम बच्चे ‘बाल संस्कार’ के…
- बाल संस्कार केन्द्र का…
- बढ़े चलो, बढ़े चलो…
- पलक पावड़े अभिनंदन को…
- हे भारत के विद्यार्थियो !…
- यह शरीर मंदिर है प्रभु का…
- न्यारे-न्यारे फूल खिले हैं…
- हम भारत के लाल हैं…
- नश्वर जहाँ में भगवन्…
- मात पिता गुरु प्रभु चरणों में…
- हिम्मत ना हारिये…
- तेरे फूलों से भी प्यार…
- हमसे प्रभुजी दूर नहीं हैं…
- जोगी रे क्या जादू है तुम्हरे प्यार में…
- भारत के नौजवानो !…
- सादा जीवन सच्चा जीवन…
- ‘बाल संस्कार’ में हम जायेंगे…
- जागृत हो भारत सारा…
- जन्मदिन तुम ऐसा मनाओ…
- बधाई हो बधाई, शुभ दिन की बधाई (जन्मदिन बधाई गीत)
- विफलता आये तो…
- मुझको बाल संस्कार में भेजिये…
- सबका मंगल सबका भला हो गुरु चाहना ऐसी है
- जे न मित्र दुख होहिं दुखारी… (संत तुलसीदासजी की प्रेरणादायी सीख)
- चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्… (श्रीमद् आद्य शंकराचार्यविरचितम् ‘निर्वाण षटकम्’ से संक्षिप्त)
- जय सद्गुरु देवन देव वरं… (गुरु-वंदना)
- संत मिलन को जाइये

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