जो जागत है सो पावत है
संसार की नश्वरता देखकर भगवान रामजी को वैराग्य हुआ, सिद्धार्थ को वैराग्य हुआ… ऐसे कइयों के पुण्योदय जागृत होते हैं तो वे अपने मनुष्य-जीवन का मुख्य उद्देश्य सिद्ध करने के रास्ते चल पड़ते हैं और आत्मसाक्षात्कर भी कर लेते हैं । आप स्वयं ही विचार कीजिये कि ‘हम क्या हैं और क्या कर रहे हैं ? अभी ईश्वरप्राप्ति के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं तो कब करेंगे ? दूसरे क्षण क्या होगा, कौन जानता है ? किसी भी क्षण मौत आ सकती है, इसमें संदेह है क्या ?’ जिसमें इस प्रकार की जागृति आती है वह व्यवहार में दक्ष होगा, किसी का अहित नहीं करेगा, सबमें अपना स्वरूप देखेगा, जिससे समाज में शांतिमय वातावरण का निर्माण होगा और विवेक प्रखर होकर वह आत्मज्ञान में स्थित हो जायेगा, आत्मसाक्षात्कार कर लेगा । ज्ञान की सात भूमिकाएँ कौन-कौन सी हैं, इस बारे में जानकारी इस पुस्तक ‘जो जागत है सो पावत है’ में दी गयी है । आप इसमें जानेंगे :
* किस मनुष्य को दो पैरवाला पशु माना गया है ?
* स्वामी विवेकानंद सात साल के साधनाकाल में किस प्रकार रहें ?
* मूर्ख हृदय न चेत…
* पहली भूमिका
* शुभेच्छा क्या होती है ?
* किसकी ध्यान, जप में रुचि बढ़ जायेगी ?
* जगत का मिथ्यात्व कब दृढ़ होता है ?
* विक्षेप से परे कौन ?
* इतना बड़ा भरापूरा संसार तब कहाँ चला जाता है ?
* तुरीयातीत पद की प्राप्ति एवं विदेहमुक्ति क्या होती है ?
* सच्चा हितैषी कौन ?
* पूज्य बापूजी का ज्योतिर्मय संदेश
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ज्ञान की सात भूमिकाएँ कौन-कौन सी हैं, इस बारे में जानकारी इस पुस्तक ‘जो जागत है सो पावत है’ में दी गयी है ।
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| Weight | 30 g |
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