तेजस्विनी भव ! – Tejaswini Bhava (Hindi)
क्या आप :
(1) जीवन में सफलताओं की बुलंदियों को छूना चाहती हैं ?
(2) प्रतिस्पर्धा के दौर में विजय पाना चाहती हैं ?
(3) अपनी महिमा को जानना चाहती हैं ?
(4) कभी-कभी स्वयं को निराश महसूस करती हैं ?
(5) जीवन की परीक्षाओं से हार मान चुकी हैं ?
(6) घोर अंधकार में आशा की किरण तलाश रही हैं ?
(7) अपना वास्तविक सौंदर्य जगाना चाहती हैं ?
यदि आपके जीवन में इनमें से एक या अधिक प्रश्नों का उत्तर ‘हाँ’ में है तो यह
छोटी-सी पुस्तिका आपके लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी । यह आपके अंदर एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाने का सामर्थ्य रखती है ।
यह पुस्तिका पूज्य संत श्री आशारामजी बापू के प्रेरक वचनों एवं सत्शास्त्रों पर आधारित है । इसका एकाग्रतापूर्वक पठन-मनन, चिंतन देदीप्यमान सूरज की तरह आपके जीवन के सारे अंधकार को हरकर आपको परम उज्ज्वल, ज्योतिर्मय, महामंगलमय मार्ग पर अग्रसर करेगा ।
(1) हे नारी ! तू नारायणी है
(2) जीवन को दिव्यता की सुवास से सुवासित करनेवाले कुछ मूलभूत सिद्धांत
(3) महानता के 8 दिव्य सूत्र और 7 हानिकारक बातें
(4) तबाही करनेवाली गंदगी से बचें
(5) यदि आप वास्तविक सौंदर्य जगाना चाहती हैं तो…
(6) आदर्श चरित्र का निर्माण
(7) निर्भय बनो
(8) स्वयं पर विश्वास करें
(9) लक्ष्य के प्रति दृढ़ता
(10) आत्मबल कैसे जगायें ?
(11) सकारात्मक दृष्टिकोण
(12) नेतृत्व की प्रतिभा
(13) तुम्हारे हाथ की बात !
(14) इन 5 से अपने को बचायें
(15) समय का सदुपयोग
(16) ऐसी महान संस्कृति से च्युत होना कितनी शर्मजनक बात है !
(17) ब्रह्मचर्य : जीवन की अनिवार्यता
(18) जीवन को सफल बनानेवाले सीताजी के 12 दिव्य गुण
(19) एकाग्रता, स्वास्थ्य, बल-बुद्धि व पुष्टि दायक विभिन्न प्रयोग

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