🌟 व्यास पूर्णिमा: प्रभु-प्राप्ति और परम सत्य के साक्षात्कार का दिव्य मार्ग 🌟
क्या आप अपने जीवन में सच्ची शांति, वैराग्य और भक्ति का संचार करना चाहते हैं? ‘व्यास पूर्णिमा’ पुस्तिका साधकों, भक्तों और मोक्षमार्ग के पथिकों के लिए पूज्यपाद स्वामी जी द्वारा परोसा गया एक ऐसा ‘प्रेरणा-पीयूष’ (अमृत) है, जो जीवन की उलझी हुई तमाम गुत्थियों को सुलझाने में आपका मार्गदर्शन करेगा।
संत तुकाराम जी की उक्ति “हमी बोलतो वेद बोलते” को चरितार्थ करती यह कृति साक्षात् वेदवाणी का अमृत है, जो आपको संसार की नश्वरता से बचाकर परमात्मा के परम सत्य से जोड़ेगी।
✨ इस पुस्तक की अनमोल विशेषताएँ:
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साधना का अद्भुत उत्साह: इसमें ऐसे अचूक और सटीक प्रसंग हैं, जो शिथिल पड़ती साधना में भी एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करते हैं।
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भक्तों और योगियों की प्रेरक कथाएँ: भिन्न-भिन्न उच्च कोटि के भक्तों, योगियों और साधकों के जीवन चरित्र द्वारा भक्ति, योग तथा साधना के गूढ़ रहस्यों को सरल रूप में समझाया गया है।
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विवेक और वैराग्य की वृद्धि: यह पुस्तक संसार के भ्रम से दूर कर बुद्धि में विवेक और हृदय में तीव्र वैराग्य जगाने में सहायक है।
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परमात्मा का साक्षात्कार: सब वृत्तियों से परे होकर उस एक निराकार परमेश्वर का अनुभव करने की अनमोल अनुभूतियाँ इसमें समाहित हैं।
📘 पुस्तक के मुख्य अध्याय (अनुक्रम):
यह लघु पुस्तिका अपने भीतर ज्ञान का अनमोल खजाना समेटे हुए है:
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व्यास पूर्णिमा – पर्व की वास्तविक महिमा और महत्व
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राही रुक नहीं सकते – पथ पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा
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साध्य को पाये बिना…….? – जीवन के असली लक्ष्य की याद
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प्रपत्तियोग – पूर्ण शरणागति का मार्ग
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ऐ राही ! बचके……. – साधना मार्ग के विघ्न-बाधाओं से सावधान करते सूत्र
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आत्यंतिक दुःखनिवृत्ति एवं कामना की निवृत्ति – दुखों से सदा के लिए मुक्ति का उपाय
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निराकार आधार हमारे……. – उस अविनाशी तत्व का चिंतन
“प्यारे साधक गण! बार-बार इस पावन प्रसाद का पठन और मनन करके अपने जीवन को उन्नत और प्रभुप्रेम से सराबोर करें।”
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